छात्र के सिर पर तबला बजाने का वीडियो वायरल, प्रभारी प्रधानाध्यापक निलंबित
इटावा के बिरौली प्राथमिक विद्यालय का मामला, विभागीय जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
इटावा (उत्तर प्रदेश)। विद्यालय को बच्चों के ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र माना जाता है, लेकिन जब शिक्षक ही कक्षा में छात्र की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार करने लगें, तो शिक्षक की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय बिरौली से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। वीडियो में विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार माथुर एक छात्र के मुंडित सिर पर तबला बजाने जैसी हरकत करते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान कक्षा में मौजूद अन्य बच्चे हंसते नजर आते हैं।
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रभारी प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया है। प्राप्त समाचार रिपोर्टों के अनुसार, विभागीय स्तर पर मामले की जांच भी कराई जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक के आचरण पर उठे सवाल
विद्यालय में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे में कक्षा के भीतर किसी छात्र के शारीरिक स्वरूप को लेकर इस तरह का व्यवहार कई सवाल खड़े करता है।
कक्षा में मौजूद दूसरे बच्चों का हंसना भी इस घटना को गंभीर बनाता है। हालांकि, वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि संबंधित छात्र की मानसिक स्थिति क्या थी या उसने इस व्यवहार को किस रूप में लिया। फिर भी विद्यालय में प्रत्येक बच्चे की गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है।
निलंबन के बाद विभागीय जांच
समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, इटावा के बिरौली प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार माथुर को निलंबित कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यह घटना एक व्यापक सवाल भी सामने रखती है कि विद्यालयों में बच्चों के साथ व्यवहार करते समय शिक्षक किस प्रकार की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दें। बच्चों के लिए विद्यालय सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण वाला स्थान होना चाहिए, जहां वे बिना किसी उपहास या अपमान के सीख सकें और आगे बढ़ सकें।