अब SIR में 45,231 मतदाताओं की कमी से चर्चा में आई सीट, 2002 से लगातार पांच चुनाव जीतते आ रहे हैं मदन कौशिक, 2022 में जीत का अंतर रहा था 15,237 वोट
हरिद्वार ( डॉ. शिवा अग्रवाल )। हरिद्वार नगर विधानसभा सीट उत्तराखंड की उन सीटों में शामिल है, जहां पिछले दो दशक से एक ही चेहरे का राजनीतिक प्रभाव लगातार दिखाई देता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता मदन कौशिक वर्ष 2002, 2007, 2012, 2017 और 2022 में लगातार पांच बार इस सीट से विधायक चुने गए हैं। मार्च 2026 में उन्हें धामी मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया।

मदन कौशिक की लगातार पांच जीत और बूथ स्तर तक संगठनात्मक पकड़ को हरिद्वार नगर की राजनीति में उनकी प्रमुख ताकत माना जाता है। दूसरी ओर, अब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता संख्या में हुए बड़े बदलाव ने इस सीट के आगामी चुनावी समीकरण को चर्चा में ला दिया है।
पांच चुनाव, लगातार पांच जीत
मदन कौशिक का हरिद्वार नगर में चुनावी सफर
2002 — पहली बार विधायक
2007 — दूसरी जीत
2012 — तीसरी जीत
2017 — चौथी जीत
2022 — पांचवीं लगातार जीत
वर्ष 2022 में मदन कौशिक को 53,147 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी को 37,910 वोट मिले। जीत का अंतर 15,237 वोट रहा।

45 हजार से ज्यादा मतदाता कम, क्यों महत्वपूर्ण है यह आंकड़ा?
उपलब्ध प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2024 में 1,54,897 मतदाता थे। SIR के बाद यह संख्या 1,09,666 बताई गई है। यानी दोनों आंकड़ों के बीच 45,231 मतदाताओं का अंतर है, जो करीब 29.2 प्रतिशत बैठता है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल संख्या में बदलाव नहीं है, बल्कि इससे विधानसभा क्षेत्र की बूथवार मतदाता संरचना भी बदल सकती है।

मतदाताओं की संख्या में कमी को सीधे तौर पर फर्जी वोट या गलत तरीके से नाम काटे जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसमें स्थानांतरित मतदाता, दूसरे स्थान पर रहने वाले मतदाता, मृत मतदाता तथा अन्य कारणों से अपात्र मतदाताओं के नाम हटना शामिल हो सकता है। इसलिए वास्तविक राजनीतिक प्रभाव का आकलन बूथवार आंकड़ों और अंतिम मतदाता सूची के आधार पर ही किया जा सकेगा।
मदन कौशिक के सामने अब चुनौती क्या?
हरिद्वार नगर सीट पर भाजपा के लिए सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन और लंबे समय से तैयार बूथ नेटवर्क माना जाता है। मदन कौशिक वर्ष 2002 से इस सीट पर लगातार चुनाव जीतते आए हैं। 2026 की रिपोर्टों में भी उन्हें हरिद्वार से लगातार पांच बार विधायक चुने जाने और उनकी संगठनात्मक भूमिका का उल्लेख किया गया है।
लेकिन SIR के बाद तस्वीर में एक नया सवाल जुड़ गया है—जिन इलाकों और बूथों से बड़ी संख्या में मतदाता कम हुए हैं, वहां चुनावी गणित किस तरह बदलेगा? यही कारण है कि अब केवल कुल मतदाताओं की संख्या ही नहीं, बल्कि बूथवार कितने नाम कम हुए, किस क्षेत्र में कितने नए मतदाता जुड़े और नए मतदाताओं का सामाजिक-भौगोलिक वितरण क्या रहा, यह भी महत्वपूर्ण होगा। 2022 का परिणाम बताता है कि अंतर कितना था हरिद्वार नगर में 2022 का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा। यानी कौशिक की जीत स्पष्ट अंतर से हुई थी, लेकिन मतदाता सूची में 45,231 का बदलाव 2022 के जीत के अंतर से लगभग तीन गुना है। इसीलिए SIR के बाद बदले मतदाता आधार को राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
असली सवाल—विपक्ष का चेहरा कौन?
हरिद्वार नगर सीट के आगामी चुनावी समीकरण में विपक्षी प्रत्याशी का चयन भी महत्वपूर्ण होगा। यदि विपक्ष मजबूत स्थानीय जनाधार वाले चेहरे को मैदान में उतारता है और उसके पास प्रभावी बूथ संगठन भी होता है, तो बदले हुए मतदाता आधार में चुनावी मुकाबले का स्वरूप अलग दिखाई दे सकता है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि SIR के कारण किसी एक दल को सीधा लाभ या नुकसान होगा। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि किस पार्टी के समर्थक क्षेत्रों में कितने नाम कम हुए और नए मतदाता किस बूथ पर जुड़ते हैं। क्या 2027 तक फिर बढ़ेगी मतदाता संख्या?
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए पात्र मतदाता निश्चित रूप से मतदाता सूची में जुड़ेंगे। लेकिन वर्तमान आंकड़ों के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि कुल संख्या 2024 के 1,54,897 के स्तर तक वापस पहुंचेगी या नहीं।
यही वजह है कि हरिद्वार नगर में अब चुनावी चर्चा केवल “कौन जीतेगा?” तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सवाल यह भी है कि “SIR के बाद किस तरह का नया मतदाता आधार तैयार हुआ है?”
आंकड़ों में मदन कौशिक का दबदबा
मदन कौशिक ने 2002 में पहली बार हरिद्वार विधानसभा से जीत दर्ज की और इसके बाद 2007, 2012, 2017 तथा 2022 में भी लगातार जीत हासिल की।
उनकी जीत का रिकॉर्ड यह बताता है कि हर चुनाव में जीत का अंतर समान नहीं रहा, बल्कि इसमें काफी उतार-चढ़ाव आया। 2002 में जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम था, जबकि 2007 और 2017 में बड़ा अंतर दर्ज हुआ। 2022 में फिर जीत का अंतर 15,237 रहा।

बड़ा सवाल ?
“पांच बार जनता का आशीर्वाद हासिल कर चुके मदन कौशिक के सामने अब SIR के बाद बदली मतदाता सूची क्या नई राजनीतिक चुनौती लेकर आएगी?”
हरिद्वार नगर सीट पर फिलहाल तस्वीर साफ है कि भाजपा के पास पांच लगातार जीत का रिकॉर्ड और मजबूत संगठनात्मक आधार है। दूसरी ओर, SIR के बाद 45,231 मतदाताओं की कमी ने चुनावी विश्लेषण के लिए एक नया आयाम जरूर जोड़ दिया है।
अब नजरें तीन चीजों पर रहेंगी—
① बूथवार कितने मतदाता कम हुए
② अगले चुनाव तक कितने नए मतदाता जुड़ते हैं
③ विपक्ष किस चेहरे और किस संगठनात्मक ताकत के साथ मैदान में उतरता है
इन्हीं तीन कारकों से यह स्पष्ट होगा कि हरिद्वार नगर में पुराना चुनावी समीकरण कायम रहता है या SIR के बाद नई मतदाता संरचना चुनावी मुकाबले को नया रूप देती है।