NEET पेपर लीक और री-एग्जाम का दबाव: कितने सपनों की कीमत चुकाएंगे छात्र?
शिक्षा का अधिकार (पूजा अग्रवाल)। देहरादून में कारगिल योद्धा राजेश मल्ल की बेटी रिया कुमारी थापा की आत्महत्या ने एक बार फिर देश की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 23 वर्षीय रिया एक मेधावी छात्रा थीं, जिन्होंने 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए थे और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थीं। उनके कमरे से मिले सुसाइड नोट में केवल इतना लिखा था – “आई लव यू मम्मी-पापा”।

स्थानीय लोगों और परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि रिया NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। बताया जा रहा है कि परीक्षा रद्द होने और 21 जून को प्रस्तावित री-एग्जाम को लेकर वह काफी तनाव में थीं। हालांकि आत्महत्या के वास्तविक कारणों की जांच पुलिस कर रही है, लेकिन इस घटना ने लाखों अभ्यर्थियों की मानसिक स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है।
NEET परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ियों के बाद री-एग्जाम की प्रक्रिया शुरू हुई है। देशभर के अनेक छात्र और अभिभावक पहले ही परीक्षा दोबारा कराने के निर्णय से मानसिक दबाव, अनिश्चितता और भविष्य की चिंता जाहिर कर चुके हैं। कई छात्र संगठनों ने भी परीक्षा आगे बढ़ाने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि परीक्षा प्रणाली की खामियों की कीमत बार-बार छात्रों को ही चुकानी पड़ेगी, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? वर्षों की मेहनत, आर्थिक संघर्ष और भविष्य के सपनों के बीच जब परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, तो सबसे अधिक चोट उन युवाओं को लगती है जिनका पूरा जीवन एक परीक्षा के परिणाम पर टिका होता है।
रिया की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था के लिए चेतावनी है जिसमें पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और बार-बार बदलते निर्णयों का सबसे बड़ा बोझ छात्रों के कंधों पर आ गिरता है। यदि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, विश्वसनीय और तनावमुक्त नहीं बनाया गया, तो यह आशंका बनी रहेगी कि व्यवस्था की कमियों की भेंट और भी सपने चढ़ सकते हैं।
अब जरूरत केवल दोषियों की गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाने की है जिसमें किसी छात्र को अपने भविष्य को लेकर इस हद तक निराश न होना पड़े।