शिक्षा का अधिकार डेस्क। हरिद्वार नगर निगम की 54 करोड़ रुपये की भूमि खरीद में सामने आए बहुचर्चित जमीन घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई का फैसला लिया है। विजिलेंस जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद सरकार ने एक आईएएस अधिकारी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति करने के साथ ही तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई का निर्णय लिया है। साथ ही कई अधिकारियों एवं भूमि विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति भी दे दी गई है।

विजिलेंस रिपोर्ट के बाद बड़ा फैसला
हाल ही में विजिलेंस ने इस पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी थी। रिपोर्ट में हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में अनियमितताओं और घोटाले की पुष्टि होने के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। हरिद्वार में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी रहे आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट देने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह की तीन वेतन वृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की अनुमति
धामी सरकार के इस फैसले को बेहद बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले इसी मामले में दो आईएएस अधिकारियों, एक पीसीएस अधिकारी और कई विभागीय अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। अब विजिलेंस जांच रिपोर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। साथ ही विजिलेंस को इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की अनुमति भी प्रदान कर दी गई है।
दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई की कागजी संस्तुति भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भेजी जाएगी। अखिल भारतीय सेवा नियमों के तहत ऐसे मामलों में राज्य सरकार अपनी संस्तुति केंद्र सरकार को भेजती है, जिसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।
मुख्यमंत्री ने शुरू से दिखाया सख्त रुख
गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में शुरू से ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। घोटाला सामने आने के बाद आईएएस अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया था। जांच में प्रथम दृष्टया यह भी सामने आया कि आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और जमीन खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया के माध्यम से नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप साबित होते हैं।
इन अधिकारियों और भूमि विक्रेताओं पर दर्ज होगा मुकदमा
इस मामले में अब विजिलेंस आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के साथ तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रा, लिपिक वेदपाल तथा मानचित्रकार दिनेश कांडपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करेगी। इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।
मनी ट्रेल की जांच होगी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, इस मामले में विजिलेंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मनी ट्रेल को पकड़ने की होगी। मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी धन के प्रवाह और पूरे नेटवर्क की पड़ताल करेगी। मनी ट्रेल की जांच के बाद ही इस मामले में संलिप्त अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकेगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
2024 में खरीदी गई थी 54 करोड़ की जमीन
दरअसल, यह घोटाला वर्ष 2024 का है, लेकिन इसका खुलासा वर्ष 2025 में हुआ। वर्ष 2024 में हरिद्वार नगर निकाय चुनाव होने थे और उस दौरान नगर निगम का पूरा प्रशासनिक तंत्र तत्कालीन नगर आयुक्त आईएएस वरुण चौधरी के अधीन था। नगर निकाय चुनाव के दौरान पूरे जिले में आचार संहिता लागू थी। इसी अवधि में हरिद्वार नगर निगम ने 54 करोड़ रुपये में 33 बीघा भूमि खरीदी थी, जिसका खुलासा चुनाव संपन्न होने के बाद वर्ष 2025 में हुआ।

कूड़ा डंपिंग क्षेत्र के पास खरीदी गई थी भूमि
मामले की जांच में सामने आया कि जिस 33 बीघा भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया, उसके समीप हरिद्वार नगर निगम का कूड़ा डंपिंग क्षेत्र स्थित है। ऐसे में उस भूमि का बाजार मूल्य इतना अधिक नहीं हो सकता था। जांच में यह भी पता चला कि नगर निगम और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने उक्त 33 बीघा कृषि भूमि को धारा 143 के तहत दर्ज करवा दिया था।
प्राथमिक जांच में सामने आई थीं गंभीर अनियमितताएं
प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। प्राथमिक जांच में भूमि खरीद में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और हरिद्वार नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को निलंबित कर दिया था। इनके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह समेत नगर निगम के कई अन्य कर्मचारियों पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई थी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश
अब विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद धामी सरकार ने इस पूरे प्रकरण में बड़ा निर्णय लेते हुए आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति कर दी है। इसे उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में बड़े अधिकारियों पर की गई अब तक की सबसे कठोर कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।