सचिवालय कूच पर पुनर्विचार कर सकते हैं शिक्षक संगठन
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर लंबे समय से असमंजस और चिंता में चल रहे हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टीईटी के मानकों में संशोधन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जल्द ही इस संबंध में संशोधित शासनादेश (जीओ) जारी किया जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2010 में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को भी टीईटी के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। राज्य में लगभग 20 हजार शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि करीब दो हजार ऐसे शिक्षक हैं, जो वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए थे और नए प्रावधान के तहत टीईटी में शामिल हो सकेंगे।
वर्तमान नियमों के तहत केवल स्नातक और डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थी ही टीईटी के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिनकी नियुक्ति बीएड, विशिष्ट बीटीसी और अन्य योग्यताओं के आधार पर बेसिक एवं जूनियर स्तर पर हुई थी। प्रस्तावित संशोधन से इन शिक्षकों को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ने टीईटी मानकों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और कुछ औपचारिक संशोधनों के बाद जल्द ही शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि राज्य में वर्ष में दो बार टीईटी का आयोजन हो।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 31 अगस्त 2028 तक सभी शिक्षकों को आरटीई के मानकों को पूरा करना होगा। ऐसे में सरकार का यह निर्णय हजारों सेवारत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। हालांकि, जिन शिक्षकों को सेवा अवधि के आधार पर टीईटी से छूट प्राप्त है, वे यदि पदोन्नति चाहते हैं तो उन्हें भी टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी।
वहीं दूसरी ओर, टीईटी के मुद्दे पर प्रदेश के शिक्षक संगठनों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है और विभिन्न संगठन देहरादून में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे थे। प्रभावित शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर सचिवालय कूच का भी निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री द्वारा टीईटी मानकों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद अब आंदोलन की धार कमजोर पड़ सकती है। माना जा रहा है कि शिक्षक संगठन सरकार के इस सकारात्मक कदम का स्वागत करते हुए सचिवालय कूच के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर उसे वापस लेने का निर्णय ले सकते हैं।