स्वामी यतीश्वरानंद के प्रयास रंग लाए, रवासन नदी पर बनेगा 250 मीटर लंबा पैदल स्टील ट्रस पुल

50 साल पुरानी मांग हुई पूरी, ₹9.12 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति जारी; रसूलपुर, मंगोलपुरा, आर्यनगर और लालढांग के लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

हरिद्वार। रवासन नदी पर पुल निर्माण की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने जा रही है। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद के प्रयासों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद 250 मीटर लंबे पैदल स्टील ट्रस पुल के निर्माण को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। शासन की ओर से परियोजना के लिए 9 करोड़ 12 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। पुल बनने से रसूलपुर, मंगोलपुरा, आर्यनगर और लालढांग क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।धरना स्थल पर पहुंचे स्वामी यतीश्वरानंद, शासनादेश पढ़कर सुनाया

सोमवार को स्वामी यतीश्वरानंद रसूलपुर में पुल निर्माण की मांग को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन में पहुंचे। इस दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार ने शासन की ओर से जारी स्वीकृति संबंधी पत्र पढ़कर सुनाया और निर्माण प्रक्रिया की जानकारी दी।

12 अक्टूबर 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार, मुख्यमंत्री घोषणा संख्या 1038/2021 के अंतर्गत प्रस्तावित पुल को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति की जानकारी मिलने पर क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा स्वामी यतीश्वरानंद का आभार व्यक्त किया।

स्वामी यतीश्वरानंद ने की थी पुल निर्माण की पैरवी

तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रहते हुए स्वामी यतीश्वरानंद ने रसूलपुर में रवासन नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव रखा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में घोषणा की थी। अब शासन से स्वीकृति मिलने के बाद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

पुल बनने से नदी के आसपास बसे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। विशेष रूप से पैदल आवाजाही करने वाले ग्रामीणों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही आसपास के गांवों के बीच संपर्क भी बेहतर होगा।

9.34 करोड़ थी अनुमानित लागत, 9.12 करोड़ रुपये स्वीकृत

शासनादेश के अनुसार, 250 मीटर लंबे पैदल स्टील ट्रस पुल की अनुमानित लागत 934.07 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। शासन स्तर पर परीक्षण के बाद 912.40 लाख रुपये यानी 9 करोड़ 12 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।

यह पुल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन बनेगा। लंबे समय से इसकी मांग कर रहे लोगों को अब निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है।

करीब 50 साल पुरानी मांग पूरी होने पर जताई खुशी

जिला पंचायत सदस्य बृजमोहन पोखरियाल ने बताया कि रवासन नदी पर पुल निर्माण की मांग करीब 50 वर्षों से की जा रही थी। पुल बनने से क्षेत्रवासियों को आवागमन में काफी आसानी होगी और आसपास के गांवों के बीच संपर्क मजबूत होगा।

उन्होंने पुल निर्माण को स्वीकृति मिलने पर प्रसन्नता जताते हुए इसे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

निर्माण से पहले डिजाइन और ड्राइंग का अनुमोदन अनिवार्य

शासन की ओर से स्वीकृति के साथ निर्माण कार्य से जुड़ी तकनीकी एवं वित्तीय शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

– पुल निर्माण शुरू करने से पहले डिजाइन एवं ड्राइंग का अधीक्षण अभियंता से अनुमोदन कराना होगा।

– एप्रोच मार्ग पर रिटेनिंग वॉल का कार्य शुरू करने से पहले उसका विस्तृत डिजाइन और ड्राइंग स्वीकृत कराना अनिवार्य होगा।

– पुल के सुपर स्ट्रक्चर के वजन में समानता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन का प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा जारी अन्य सेतुओं के डिजाइन के आधार पर परीक्षण कराया जाएगा।

– निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले वित्त विभाग के शासनादेश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

– स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित बजट सीमा के भीतर ही किया जाएगा। बजट की उपलब्धता से अधिक व्यय नहीं किया जा सकेगा।

इन लोगों ने जताया आभार

इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य बृजमोहन पोखरियाल, मंडल अध्यक्ष विक्रम चौहान, आलोक द्विवेदी, सुरेंद्र, दीपक जखमोला, ग्राम प्रधान कमलेश द्विवेदी, शिव सिंह राव, लक्ष्मी प्रसाद ममगाई, मोहम्मद एहसान, प्रेम सिंह, तारा सिंह, दरबान सिंह राणा, जगदीश रयाल, गोपी जायसवाल, विनोद सैनी, महानन्द सैनी, विनय सैनी और श्याम प्रसाद सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

इसके अलावा कल्पना, पूनम, मुन्नी देवी, सलोचना देवी, कमला, उर्मिला, मंगली, उषा, रेखा, सुशीला देवी, सुमित्रा, जगमा, मानसी, अनीता, रेनू, सुमन, सुमति, दुर्गा और कीर्तो देवी सहित अन्य क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वामी यतीश्वरानंद का धन्यवाद करते हुए आभार जताया। रवासन नदी पर पुल निर्माण की स्वीकृति से क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अब क्षेत्रवासियों को निर्माण कार्य शुरू होने और पुल के जल्द तैयार होने का इंतजार है।

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