छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल; मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद डॉ. बिसेन को उत्तराखंड की कमान
देहरादून/नई दिल्ली। देश के छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल के बीच डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को की गई नियुक्तियों की घोषणा के बाद उत्तराखंड के राज्यपाल पद पर भी बदलाव तय हो गया है। डॉ. बिसेन मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और बालाघाट लोकसभा क्षेत्र से सांसद के रूप में संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र की ओर से कई राज्यों के संवैधानिक प्रमुखों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। हालांकि, डॉ. बिसेन के शपथ ग्रहण और पदभार संभालने की तारीख की पुष्टि अलग से की जानी बाकी है।
छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति से जुड़ा फैसला
राष्ट्रपति की ओर से घोषित बदलावों के तहत उत्तराखंड के अलावा केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और सिक्किम में भी राज्यपालों की नियुक्ति या स्थानांतरण किया गया है।
घोषित बदलावों के अनुसार, सिक्किम के राज्यपाल रहे ओम प्रकाश माथुर को केरल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु भेजा गया है। झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रज मोहन राम को ओडिशा और डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति भी इसी व्यापक फेरबदल का हिस्सा है। इन नियुक्तियों का प्रभाव संबंधित राज्यपालों के पदभार ग्रहण करने की तारीख से लागू होगा।
मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ा रहा है डॉ. बिसेन का सफर
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल हैं। उनका राजनीतिक सफर राज्य की राजनीति से शुरू होकर संसद तक पहुंचा। वह मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में बालाघाट संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह लोकसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों में शामिल रहे।
विधायक, मंत्री और सांसद के रूप में उनका अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा है। अब उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में प्रस्तावित नई भूमिका में उन्हें एक अलग प्रकार की संवैधानिक जिम्मेदारी निभानी होगी।
राजनीतिक अनुभव से संवैधानिक भूमिका तक का सफर
डॉ. बिसेन की नियुक्ति के बाद उत्तराखंड में उनके कार्यकाल और प्राथमिकताओं को लेकर उत्सुकता रहेगी। विधायक, मंत्री और सांसद के रूप में राजनीति में सक्रिय रहने के बाद राज्यपाल की भूमिका में उनसे संविधान के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा होगी।
राज्यपाल का पद राजनीतिक पदों से अलग संवैधानिक मर्यादाओं और दायित्वों से जुड़ा होता है। इस पद पर रहते हुए विधानसभा की कार्यवाही, विधेयकों से संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं और राज्य सरकार के साथ औपचारिक संवाद जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं।
उत्तराखंड में उनकी नियुक्ति के बाद उनके पदभार ग्रहण करने, शपथ ग्रहण समारोह और आगामी आधिकारिक कार्यक्रमों से संबंधित जानकारी पर भी नजर रहेगी।
पदभार ग्रहण करने की तारीख पर रहेगी नजर
राज्यपालों की नियुक्ति संबंधी घोषणा के बाद औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करना अगला महत्वपूर्ण चरण होता है। नई नियुक्तियां संबंधित व्यक्तियों के कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी।
ऐसे में उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में डॉ. ढाल सिंह बिसेन के शपथ ग्रहण समारोह और पदभार ग्रहण करने की आधिकारिक तारीख की पुष्टि के बाद इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
फिलहाल, डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति उत्तराखंड के संवैधानिक नेतृत्व में होने वाला महत्वपूर्ण बदलाव है। उनके कार्यभार संभालने के बाद राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका और आधिकारिक कार्यक्रमों से संबंधित विवरण सामने आने की संभावना है।