नौकी दासोवाली विद्यालय के पास जर्जर यूकेलिप्टस के पेड़ों से हादसे का खतरा, वन विभाग से कार्रवाई की मांग

हरिद्वार। बहादराबाद ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नौकी दासोवाली के समीप खड़े पुराने और जर्जर यूकेलिप्टस के पेड़ विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। पेड़ों की कमजोर होती स्थिति और बारिश के कारण इनके गिरने की आशंका को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति ने वन विभाग से आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

बारिश से कमजोर हो रहे पेड़, कभी भी हो सकता है हादसा

विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव प्रधानाचार्य महिपाल सिंह की ओर से वन क्षेत्राधिकारी, रेंज अधिकारी, रसियाबड़ रेंज, हरिद्वार को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि विद्यालय भवन के ठीक समीप वन विभाग के कई यूकेलिप्टस के पेड़ खड़े हैं। इनमें से कुछ पेड़ काफी पुराने और कमजोर हैं, जबकि कुछ पेड़ 20 डिग्री से अधिक झुक चुके हैं। अत्यधिक बारिश के कारण इन पेड़ों की जड़ें कमजोर होने की आशंका है, जिससे इनके अचानक गिरने का खतरा बढ़ गया है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

विद्यालय परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं। इसके अलावा विद्यालय के पास आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित है, जहां छोटे बच्चे आते हैं। ऐसे में यदि कोई पेड़ गिरता है तो विद्यार्थियों, आंगनबाड़ी के बच्चों और आसपास मौजूद लोगों के साथ गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

पहले भी दिया गया था प्रार्थना पत्र

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी 31 अगस्त 2026 को वन विभाग को प्रार्थना पत्र देकर समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन पत्र में उल्लेख किया गया है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विद्यालय प्रबंधन ने एक बार फिर विभाग से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

पेड़ों की छंटाई या कटान की मांग

विद्यालय प्रबंधन समिति और विद्यालय प्रशासन ने वन विभाग से मौके का निरीक्षण कर पेड़ों की स्थिति का आकलन करने तथा आवश्यकतानुसार उनकी छंटाई या कटान की कार्रवाई करने का अनुरोध किया है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि समय रहते इन जर्जर पेड़ों के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इसलिए संबंधित विभाग को मामले में गंभीरता दिखाते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।

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