हरिद्वार (पूजा अग्रवाल)। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा होने से पहले ही हरिद्वार जिले की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों—हरिद्वार नगर और रानीपुर—में मतदाता सूची के सत्यापन और मैपिंग के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला सामने आया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दोनों विधानसभा क्षेत्रों से कुल 63,798 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।
अब जबकि निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी गई है और प्रदेशभर में इसके लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया गया है, ऐसे में प्री-एसआईआर अवधि में हटाए गए मतदाताओं के आंकड़े एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं।
प्री-एसआईआर में हटे थे हजारों नाम
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार हरिद्वार नगर विधानसभा क्षेत्र से 30,572 तथा रानीपुर विधानसभा क्षेत्र से 33,226 मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। यह कार्रवाई उस समय की गई थी जब एसआईआर की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मतदाताओं की मैपिंग और सत्यापन का कार्य चल रहा था। बताया गया था कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा था, जिसके आधार पर मृत, स्थानांतरित अथवा अन्य कारणों से अपात्र पाए गए नाम सूची से हटाए गए।
अब आधिकारिक रूप से शुरू हुआ एसआईआर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार एसआईआर के तहत गणना प्रपत्रों की छपाई एवं कार्मिकों का प्रशिक्षण 29 मई से 7 जून तक किया जाएगा। 8 जून से 7 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण एवं संग्रहण करेंगे। 7 जुलाई को मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किया जाएगा तथा 14 जुलाई को ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन होगा।
इसके बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। 10 जुलाई से 11 सितंबर तक नोटिस जारी करने एवं दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया चलेगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार प्रदेश में एसआईआर के अंतर्गत अब तक लगभग 87 प्रतिशत मतदाताओं की गणना एवं मैपिंग पूरी की जा चुकी है।
राजनैतिक दलों में खलबली
एसआईआर की औपचारिक घोषणा से पहले हरिद्वार नगर और रानीपुर विधानसभा क्षेत्रों से 63,798 मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आंकड़े सामने आने के बाद राजनीतिक दलों में खलबली मच गई है। विभिन्न दल अब यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि हटाए गए मतदाताओं में कितने नाम वास्तविक रूप से अपात्र थे और कितने मतदाता तकनीकी अथवा सत्यापन संबंधी कारणों से सूची से बाहर हुए।
विधानसभा चुनाव से पहले इतने बड़े पैमाने पर नाम विलोपन को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक दलों की नजर अब एसआईआर की आधिकारिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है और वे यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
मतदाताओं को मिलेगा दावा-आपत्ति का अवसर
निर्वाचन विभाग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम किसी कारणवश सूची से हट गया है या विवरण में त्रुटि है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा एवं आपत्ति प्रस्तुत कर अपना नाम पुनः शामिल करा सकता है। विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बीएलओ द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले गणना प्रपत्र को समय पर भरें तथा मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति की जांच अवश्य करें।
प्री-एसआईआर के दौरान सामने आए 63,798 मतदाताओं के नाम विलोपन के आंकड़े और अब शुरू हुई आधिकारिक एसआईआर प्रक्रिया हरिद्वार जिले की चुनावी राजनीति में आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।