हरिद्वार/ शिक्षा का अधिकार डेस्क। उत्तराखंड में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत 25 अप्रैल से भवन गणना एवं सूचीकरण का कार्य शुरू हो चुका है, जो आगामी 24 मई तक संचालित किया जाना है। लेकिन जनपद हरिद्वार में यह कार्य शुरुआत से ही विवादों और अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में आ गया है। विभागीय लापरवाही, गलत क्षेत्र निर्धारण, असमान कार्य वितरण और तकनीकी खामियों के चलते प्रगणकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
प्रगणकों का आरोप है कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि एक प्रगणक को औसतन 150 से 200 जनगणना भवनों की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य को व्यवस्थित रूप से पूरा किया जा सके। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। कई प्रगणकों को 500 से 750 भवनों तक का कार्यभार सौंप दिया गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में भवनों की संख्या 1000 तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। वहीं दूसरी ओर कुछ प्रगणकों को 100 से भी कम भवन आवंटित किए गए हैं, जिससे कार्य वितरण में भारी असमानता नजर आ रही है।
प्रगणकों का कहना है कि तहसील प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा क्षेत्रों का सही चिह्नीकरण नहीं किया गया। आरोप है कि लेखपालों द्वारा गलत सीमांकन किए जाने के कारण कई स्थानों पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिन नक्शों और गूगल मैप्स के आधार पर क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं, वे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रहे। कई क्षेत्रों में नक्शों में दर्शाई गई संख्या की तुलना में वास्तविक भवन कहीं अधिक पाए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को अतिरिक्त दबाव और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत की और समस्याओं के समाधान की मांग की, तो जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। लगातार शिकायतों के बावजूद व्यवस्थाओं में कोई ठोस सुधार नहीं हो पा रहा है। प्रगणकों का कहना है कि यदि समय रहते क्षेत्र निर्धारण और कार्य वितरण में सुधार नहीं किया गया तो निर्धारित समय सीमा के भीतर जनगणना कार्य को पूरा करना कठिन हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रारंभिक स्तर पर इस प्रकार की अव्यवस्थाएं भविष्य में आंकड़ों की शुद्धता और कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। यदि जमीनी स्तर पर समन्वय और तकनीकी व्यवस्थाएं मजबूत नहीं की गईं तो इसका असर आगामी जनसंख्या आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर डिजिटल जनगणना के लिए तैयार किए गए मोबाइल ऐप को लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष देखा जा रहा है। प्रगणकों का कहना है कि ऐप में कई तकनीकी खामियां मौजूद हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐप में एंट्री एडिट करने का विकल्प तो दिया गया है, लेकिन गलत प्रविष्टि को पूरी तरह डिलीट करने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। यदि किसी एंट्री को हटाया जाता है तो लाइन नंबर स्वतः बदल जा रहे हैं, जिससे रिकॉर्ड में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी समस्याओं के कारण डेटा की शुद्धता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। प्रगणकों ने मांग की है कि ऐप की खामियों को जल्द दूर किया जाए तथा जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं में सुधार कर कर्मचारियों को राहत प्रदान की जाए।
