देहरादून। नई पाठ्यचर्या लागू होने के साथ ही सरकारी स्कूलों की छुट्टियों में कटौती को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति अब लगभग साफ होती नजर आ रही है। शिक्षा विभाग ने शिक्षक संगठनों के साथ हुई सहमति के बाद शासन को संशोधित प्रस्ताव भेज दिया है, जिसके तहत अवकाश में कमी के बदले शिक्षकों को वर्षभर में पांच विशेष अवकाश (स्पेशल लीव) देने का प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से साल में न्यूनतम 220 कार्य दिवस अनिवार्य किए गए हैं। इस नए प्रावधान के चलते अब सर्दी और गर्मी की छुट्टियों की कुल अवधि 48 दिनों से घटाकर 43 दिन कर दी गई है। इससे शिक्षकों के बीच असंतोष की स्थिति बन रही थी, क्योंकि लंबे समय से वे अवकाश में कटौती के बदले किसी वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे थे।
शिक्षक संघों ने पहले चरण में उपार्जित अवकाश (Earned Leave) देने की मांग रखी थी, जिस पर शिक्षा विभाग ने सहमति जताते हुए प्रस्ताव शासन को भेजा था। हालांकि वित्त विभाग से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना कम बताई जा रही है। इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने नया विकल्प तैयार किया है, जिसमें पांच विशेष अवकाश देने का प्रस्ताव शामिल है।
बताते चलें कि वर्तमान में शिक्षकों को एक वर्ष में तीन विशेष अवकाश देय हैं, जो उपभोग न करने की स्थिति में संचित हो जाते हैं। नए प्रस्ताव के लागू होने पर इन अवकाशों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी, जिन्हें शिक्षक अपनी सुविधा अनुसार कभी भी ले सकेंगे। यह व्यवस्था ग्रीष्मकालीन अवकाश में पांच दिन की कटौती के साथ प्रभावी की जाएगी।