देहरादून/हरिद्वार। जनगणना कार्य को लेकर देहरादून स्थित जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक-कार्मिकों को पढ़ाई के साथ-साथ जनगणना कार्य भी करना होगा और किसी भी कर्मचारी को एकतरफा कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। जहां-जहां ऐसे आदेश जारी हुए हैं, उन्हें वापस लिया जा रहा है।
निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार उत्तराखंड में प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 180 घरों की गणना करनी है, जिसे 30 दिनों के भीतर पूरा कराया जाएगा। इसके लिए अलग से मानदेय भी निर्धारित किया गया है। उनका कहना है कि यह पार्ट-टाइम ड्यूटी है, जिससे विद्यालयों का नियमित कार्य प्रभावित नहीं होगा। साथ ही अधिकतर शिक्षकों की ड्यूटी उनके तैनाती क्षेत्र के आसपास ही लगाई गई है।
हरिद्वार में जमीनी हकीकत अलग, बढ़ा आक्रोश
लेकिन हरिद्वार में स्थिति निदेशालय के दावों से अलग नजर आ रही है। यहां कई शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी उनके कार्यस्थल से काफी दूर-दराज क्षेत्रों में लगा दी गई है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि:
ड्यूटी आवंटन में स्थानीयता का ध्यान नहीं रखा गया
लंबी दूरी तय करने से समय और कार्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं
शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हो रहा
तहसील हरिद्वार में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। तहसील हरिद्वार में ड्यूटी आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिक्षकों के अनुसार कथित रूप से पैसे लेकर कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी काटी गई। चहेते लोगों को नजदीक ड्यूटी दी गई। जबकि अन्य कर्मचारियों, विशेषकर महिला शिक्षकों को 30–40 किलोमीटर दूर तक ड्यूटी दे दी गई महिला शिक्षकों ने इसे असुविधाजनक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंताजनक बताया है।
जांच की मांग, प्रशासन पर सवाल
इन आरोपों के बाद शिक्षकों में भारी रोष है और उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
ऊपर से “सुविधाजनक और पारदर्शी ड्यूटी” के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हरिद्वार में सामने आ रही तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है और व्यवस्था में सुधार कब तक होता है।