नई दिल्ली। पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) की बहाली की मांग कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार से फिलहाल राहत नहीं मिली है। केंद्र ने संसद में स्पष्ट किया है कि पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने इसके पीछे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले संभावित भारी वित्तीय बोझ का हवाला दिया है।
लोकसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ओपीएस बहाल करने पर विचार नहीं कर रही है। सरकार के अनुसार, पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने से आने वाले वर्षों में सरकारी खर्च में काफी वृद्धि हो सकती है। संसदीय जवाब के मुताबिक राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से हटकर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने के संबंध में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को जानकारी दी है। 26 जुलाई 2026 तक इन राज्यों का हजारों करोड़ रुपये एनपीएस में जमा था। राजस्थान में 53,403.89 करोड़, पंजाब में 40,673.08 करोड़, छत्तीसगढ़ में 24,030.04 करोड़, झारखंड में 14,420.90 करोड़ और हिमाचल प्रदेश में 12,525.96 करोड़ रुपये जमा थे।
राज्यों को वापस नहीं मिलेगा एनपीएस का पैसा

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा कानून में एनपीएस में जमा राशि राज्यों को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस राशि में कर्मचारियों और सरकार दोनों का अंशदान शामिल है। ओपीएस में सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित पेंशन का भुगतान सरकार करती है, जबकि एनपीएस अंशदान आधारित व्यवस्था है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जमा राशि तथा निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है।