शिक्षा का अधिकार ( डॉ. शिवा अग्रवाल)। उत्तराखंड के पहाड़ों में जहां एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंचने में कभी-कभी घंटों लग जाते हैं, वहीं अब एक युवा ने ऐसी कल्पना को हकीकत का रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जो अब तक सिर्फ फिल्मों में ही दिखाई देती थी। अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम के निकट काफलीखान गांव के रहने वाले युवा नवाचारक रवि टम्टा ने एक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल (छोटा हेलीकॉप्टर) का प्रोटोटाइप तैयार कर उसका सफल परीक्षण किया है।
हाल ही में अल्मोड़ा में किए गए परीक्षण के दौरान रवि ने अपने स्वदेशी फ्लाइंग व्हीकल को हवा में उड़ाकर दिखाया। यह दृश्य देखने वाले स्थानीय लोग हैरान रह गए, जबकि सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से चर्चा का विषय बन गया। सीमित संसाधनों में तैयार इस उड़नखटोले ने यह संदेश दिया है कि यदि जज्बा और नवाचार की सोच हो, तो बड़े सपनों को भी उड़ान दी जा सकती है।
रवि टम्टा का कहना है कि उनका सपना ऐसा पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल विकसित करना है, जो सड़क पर सामान्य कार की तरह चल सके और आवश्यकता पड़ने पर सीधे हवा में उड़कर कम समय में मंजिल तक पहुंचा दे। खास बात यह है कि इस परियोजना को पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत और आधुनिक तकनीक के साथ विकसित किया जा रहा है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जहां सड़कें संकरी हैं, कई गांव अब भी लंबी पैदल दूरी पर बसे हैं और अक्सर जाम या भूस्खलन के कारण आवागमन बाधित हो जाता है, वहां इस तरह का नवाचार भविष्य में परिवहन व्यवस्था के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक विकसित होकर व्यावसायिक रूप लेती है, तो पहाड़ों में यात्रा का पूरा स्वरूप बदल सकता है।
रवि टम्टा ने यह उपलब्धि किसी बड़े उद्योग या अत्याधुनिक प्रयोगशाला के सहारे नहीं, बल्कि अपनी लगन, तकनीकी समझ और सीमित संसाधनों के बल पर हासिल की है। उनका यह प्रयास उत्तराखंड के युवाओं की प्रतिभा, आत्मनिर्भर सोच और नवाचार की क्षमता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
फिलहाल यह प्रोटोटाइप परीक्षण के चरण में है, लेकिन जिस आत्मविश्वास के साथ रवि अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहे हैं, उसने यह उम्मीद जगा दी है कि आने वाले समय में उत्तराखंड का यह युवा देश के स्वदेशी एयरोस्पेस नवाचारों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।