सीबीएसई को देशभर में लागू करने के निर्देश; स्कूल नहीं बना सकेंगे दबाव, परीक्षा या प्रवेश के लिए भी नहीं कर सकेंगे अनिवार्य।
नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) ID पूरी तरह स्वैच्छिक होगी और इसे बनवाने के लिए माता-पिता की स्पष्ट सहमति आवश्यक होगी। किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर APAAR ID या आधार उपलब्ध कराने का दबाव बनाने का अधिकार नहीं होगा।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई (तत्कालीन पीठ के अनुसार) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए किसी छात्र को APAAR ID या आधार नहीं होने के कारण परीक्षा, प्रवेश या किसी अन्य शैक्षणिक सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले का उल्लेख करते हुए सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करे। अदालत ने कहा कि स्कूलों के सहमति पत्र में अभिभावकों को ‘ऑप्ट-आउट’ (इंकार) का स्पष्ट विकल्प दिया जाना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति बिना इच्छा के इस योजना में शामिल न हो।
अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 सर्वोच्च रहेगा। सीबीएसई या किसी अन्य संस्था का कोई नियम या सर्कुलर इस कानून के विपरीत नहीं हो सकता। बच्चों का व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने और उसका उपयोग करने में डेटा सुरक्षा कानून का पूरी तरह पालन करना होगा।
क्या है APAAR ID?
APAAR ID नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत शुरू की गई 12 अंकों की एक विशिष्ट छात्र पहचान संख्या है। इसे छात्रों का ‘डिजिटल अकादमिक पासपोर्ट’ भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की मार्कशीट, प्रमाणपत्र, डिग्री और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना है। हालांकि, इस योजना को आधार से जोड़ने और डेटा गोपनीयता को लेकर कई अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी।
अदालत की प्रमुख टिप्पणियां
APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है, इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
अभिभावकों की स्पष्ट सहमति के बिना APAAR ID नहीं बनेगी।
स्कूल किसी भी छात्र या अभिभावक पर दबाव नहीं डाल सकते।
APAAR ID या आधार के अभाव में परीक्षा या शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
DPDP Act, 2023 के प्रावधानों का हर हाल में पालन करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देशभर के अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। अब APAAR ID केवल अभिभावकों की स्वैच्छिक सहमति से ही बनाई जा सकेगी और स्कूल इसे अनिवार्य नहीं कर सकेंगे।