शिक्षा का अधिकार, डॉ. शिवा अग्रवाल। देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला चिंता का विषय बन गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सेवा में कार्यरत उन शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य होगी, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) और TET व्यवस्था लागू होने से पहले हुई थी। हालांकि अदालत ने राहत देते हुए TET उत्तीर्ण करने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उत्तराखंड समेत कई राज्यों के उन शिक्षकों पर पड़ेगा, जो पिछले डेढ़-दो दशक से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं लेकिन TET उत्तीर्ण नहीं हैं। उत्तराखंड में अनुमानित 24 हजार बेसिक, जूनियर हाईस्कूल और एलटी (LT) कैडर के शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं।
क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम शिक्षक योग्यता आवश्यक है और TET उसी व्यवस्था का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि केवल नियुक्ति की पुरानी तिथि के आधार पर शिक्षकों को इस मानक से स्थायी छूट नहीं दी जा सकती। हालांकि व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए अदालत ने राज्यों को पर्याप्त अवसर देने के निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्यों द्वारा TET परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित की जाएं ताकि शिक्षक समय-सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण कर सकें।
उत्तराखंड में क्यों बढ़ी चिंता?
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों की चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिनकी नियुक्ति TET व्यवस्था लागू होने से पहले हुई थी। इनमें से कई शिक्षक 20 से 25 वर्षों का अनुभव रखते हैं और अब सेवा के अंतिम वर्षों में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि जब वे वर्षों से सफलतापूर्वक बच्चों को पढ़ा रहे हैं, तो करियर के अंतिम पड़ाव में उनसे दोबारा पात्रता परीक्षा पास करने की अपेक्षा व्यावहारिक नहीं है। कई वरिष्ठ शिक्षकों ने इसे मानसिक दबाव बढ़ाने वाला निर्णय बताया है।
किन शिक्षकों को मिली राहत?
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण राहत भी दी है। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम समय शेष है, उन्हें नौकरी जारी रखने के लिए TET पास करने की अनिवार्यता से छूट दी गई है। हालांकि पदोन्नति के लिए TET की शर्त लागू रह सकती है।
देश भर में लाखों शिक्षक प्रभावित
शिक्षक संगठनों के अनुसार इस फैसले का प्रभाव पूरे देश में लगभग 25 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में शिक्षक इस श्रेणी में आते हैं। कई राज्यों ने पहले भी इस विषय पर पुनर्विचार और राहत की मांग उठाई थी।
शिक्षक संगठनों की मांग
उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि अनुभवी शिक्षकों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। संगठनों का सुझाव है कि:
वरिष्ठ शिक्षकों के लिए अलग TET परीक्षा आयोजित की जाए।
न्यूनतम उत्तीर्णांक (Passing Marks) में छूट दी जाए।
विभागीय प्रशिक्षण और विशेष कोचिंग की व्यवस्था की जाए।
संसद के आगामी सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन कर राहत प्रदान की जाए।
आगे क्या?
अब सबकी नजर केंद्र और राज्य सरकारों पर है। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग को आने वाले समय में प्रभावित शिक्षकों का विस्तृत आंकलन करना होगा। साथ ही TET परीक्षा की तैयारी, प्रशिक्षण और परीक्षा आयोजन को लेकर स्पष्ट रोडमैप तैयार करना पड़ेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है—31 अगस्त 2028 तक निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करना होगा। ऐसे में उत्तराखंड के हजारों शिक्षकों के लिए अगले दो वर्ष चुनौती और तैयारी दोनों के होंगे।