शिक्षा का अधिकार, डेस्क (डॉ. शिवा अग्रवाल)। उत्तराखंड की बेटियां अपनी हिम्मत और संघर्ष के लिए जानी जाती हैं। ऐसी ही एक बेटी थीं राजकीय शिक्षिका सृष्टि कंडारी, जिन्होंने अपने साहस और आत्मविश्वास से अलग पहचान बनाई थी। पहाड़ की कठिन राहों पर बुलेट मोटरसाइकिल दौड़ाकर रोज विद्यालय पहुंचने वाली सृष्टि आज खुद एक ऐसी कहानी बन गई हैं, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
पौड़ी जनपद के श्रीनगर से रिगोली स्थित विद्यालय तक का सफर आसान नहीं था। संकरी पहाड़ी सड़कें, घने जंगल और कई किलोमीटर का सुनसान रास्ता रोज उनकी परीक्षा लेता था। बावजूद इसके, सृष्टि कभी पीछे नहीं हटीं। विद्यालय में बच्चों को पढ़ाना उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जुनून था। उनके छात्र और स्थानीय लोग उन्हें एक निडर और प्रेरणादायी शिक्षिका के रूप में याद करते हैं।सृष्टि का आत्मविश्वास उनकी पहचान था। जो रास्ते दूसरों के लिए चुनौती थे, उन्हें वह सामान्य दिनचर्या की तरह तय करती थीं। यही कारण था कि क्षेत्र में लोग उन्हें साहसी बेटी के रूप में जानते थे।
लेकिन अब उसी सृष्टि की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी और परिवार ने उनकी नई जिंदगी को लेकर कई सपने संजोए थे। अचानक आई इस दुखद खबर ने न सिर्फ परिवार, बल्कि उन्हें जानने वाले हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया।
मृतका के परिजनों ने सचिवालय में तैनात उनके पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस सभी तथ्यों और परिस्थितियों की गहन पड़ताल कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सृष्टि के भाई का कहना है कि उनकी बहन बेहद मजबूत इरादों वाली थी और जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना करती थी। परिवार का मानना है कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
सृष्टि कंडारी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन शिक्षा के प्रति उनका समर्पण, उनका साहस और उनका संघर्ष लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा। अब पूरा उत्तराखंड इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण निष्कर्ष का इंतजार कर रहा है।