देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड) के तहत मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम के लंबित भुगतान का मामला एक बार फिर गरमा गया है। उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण पर गोल्डन कार्ड और नॉन-गोल्डन कार्ड धारकों के साथ अलग-अलग नीति अपनाने का आरोप लगाया है। मंच का कहना है कि गोल्डन कार्ड धारकों के करोड़ों रुपये के मेडिकल क्लेम पिछले करीब नौ माह से लंबित हैं, जबकि अन्य श्रेणी के दावों का भुगतान तेजी से किया जा रहा है।
मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनवरी 2021 से 18 जुलाई 2026 तक योजना को 788.20 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें 713.20 करोड़ रुपये कर्मचारियों एवं पेंशनरों के अंशदान तथा 75 करोड़ रुपये राज्य सरकार से प्राप्त हुए। इसी अवधि में कुल 768.06 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें 454.31 करोड़ रुपये आईपीडी और 313.75 करोड़ रुपये ओपीडी उपचार पर व्यय हुए।
मंच का दावा है कि 10 अक्टूबर 2025 से गोल्डन कार्ड धारकों के लगभग 48 हजार ओपीडी रीइम्बर्समेंट क्लेम, जिनकी कुल राशि करीब 86.40 करोड़ रुपये है, अब तक लंबित हैं। जबकि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के पास लगभग 20.14 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है।
कार्मिक एकता मंच ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों और पेंशनरों से नियमित अंशदान लेने के बावजूद उन्हें समय पर कैशलेस उपचार और मेडिकल रीइम्बर्समेंट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मंच ने इसे गोल्डन कार्ड धारकों के साथ भेदभाव बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित दावों का ब्याज सहित भुगतान नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू किया जाएगा।