एक भारतीय सैनिक के भाव नवाचारी
शिक्षक सुंदरपाल के शब्दों में

तुमने धर्म पूछकर मारा था,
हम धर्म बताने आये हैं।
तुम लायक नहीं हो दोजख के
जन्नत पहुँचाने आये हैं ।।
लेकर के सहारा बच्चों का,
निहत्यों को तुमने मार दिया।
धर्म जानने की खातिर,
उनका अधोवस्त्र उतार दिया।
भागो निर्लज्जो भागो तुम,
हम तुम्हे भगाने आये हैं।
तुम लायक नहीं…….
पहुंचाना चाहते थे अपना,
पैगाम हमारे नायक को ।
आदेश हुआ उस नायक का,
कायरों जिसके तुम लायक हो।
मारेंगे घर में घुस-घुस कर,
ये पैगाम सुनाने आये हैं।
तुम लायक नहीं……..
कसम हमें है जननी की,
अब तुमको नहीं हम बख्शेंगे।
वो हाल करेगें ऐसा अब,
ना नाम रहेगा नक्शे पे
एक बदले हुए इस भारत की,
तस्वीर दिखाने आये हैं
तुम लायक नहीं हो…..
भारत माता की जय
कवि सुंदरपाल राजकीय प्राथमिक विद्यालय खांडगांव में सहायक अध्यापक हैं और एक नवाचारी शिक्षक हैं।