हरिद्वार। हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत एक गंभीर और विचारोत्तेजक सत्र “प्रेमभंवर से स्थितप्रज्ञ तक” से हुई। इस सत्र में मुख्य वक्ता उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अनिल रतुडी ने अपने विचार रखे।

सत्र के दौरान अनिल रतुडी ने कहा कि रचनात्मकता को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं होता, लेकिन साहित्य को लेकर प्रशिक्षित और संवेदनशील दृष्टि रखने वाला व्यक्ति उसकी परतों को अधिक गहराई से समझ सकता है। उन्होंने प्रेम को मनुष्य की सबसे बड़ी आदर्श क्षमता बताते हुए कहा कि प्रेम व्यक्ति को भीतर से रूपांतरित कर देता है।
इस संवाद सत्र में उन्होंने पुलिस सेवा के दौरान के संस्मरण भी साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि किसी भी कृति का अंतिम मूल्यांकन लेखक नहीं, बल्कि पाठक करता है, क्योंकि रचना पाठक के अनुभव और संवेदना से ही पूर्ण होती है। संवाद सत्र को संजय हांडा ने मॉडरेट किया। इस संवाद सत्र में राज्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी भी उपस्थित रही।इस सत्र की सूत्रधार डॉ. मंजूषा कौशिक एवं डॉ. रीना वर्मा संयुक्त रूप से रही।