शिक्षकों को सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षक जिनकी नौकरी पांच वर्ष से अधिक बची है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करनी होगी। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक तय समय सीमा के भीतर टीईटी पास करने में विफल रहता है तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या उन्हें जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने उन शिक्षकों को राहत दी है, जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने फैसले में स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें टीईटी उत्तीर्ण करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस अवधि में उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। पीठ ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार सहित कई अन्य की ओर से दाखिल 87 अपीलों पर यह फैसला सुनाया है।