महंत नरेंद्र गिरि हत्याकांड में सीबीआई की सुस्ती से पुजारी आद्या तिवारी ज़मानत पर रिहा, अन्य भी आ सकते हैं बाहर

हरिद्वार डेस्क। सीबीआई की सुस्ती के कारण सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि की 2021 में हुई हत्या के मामले में आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि मुकदमे को पूरा होने में समय लगने की संभावना है।

हाल ही में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 अक्तूबर 2025 का आदेश रद्द करते हुए आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। पीठ ने कहा कि सीबीआई 150 गवाहों में से सिर्फ तीन से ही पूछताछ कर पाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है। वैसे भी, अपीलकर्ता मुख्य आरोपी प्रतीत नहीं होता है। हमारा यह मानना है कि मुकदमे की सुनवाई तक अपीलकर्ता को और हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।

भारत में संतों के सबसे बड़े संगठन के अध्यक्ष गिरि 20 सितंबर 2021 को इलाहाबाद के बाघंबरी मठ में फंदे से लटके हुए पाए गए थे। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा था कि गिरि को अपने शिष्य आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी से इतनी ‘मानसिक पीड़ा’ मिली थी कि उन्होंने समाज में अपमानित होने से बचने के लिए अपनी जान दे दी। इस हाई प्रोफाइल प्रकरण में आद्या प्रसाद तिवारी की जमानत से अन्य लोगों की जमानत की संभावना बढ़ गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *