हरिद्वार। जनपद के राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक तथा शासन द्वारा सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को अधिवर्षता आयु पूर्ण करने के बाद सत्रांत लाभ दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) ने उपशिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चन्द ने कहा है कि सत्रांत लाभ से जुड़े प्रकरण पूर्ण अभिलेखों के साथ समय से कार्यालय को उपलब्ध कराए जाएं।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि कई बार यह देखा जा रहा है कि शिक्षकों के सत्रांत लाभ से संबंधित प्रस्ताव अपूर्ण अवस्था में या विलंब से कार्यालय को भेजे जाते हैं, जिससे प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में सभी उपशिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रकरणों का पूर्ण परीक्षण कर अपनी संस्तुति अथवा असंस्तुति के साथ 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए।
निर्देशों के अनुसार सत्रांत लाभ उन्हीं शिक्षकों को दिया जाएगा जिनका सेवाकाल में कार्य एवं आचरण संतोषजनक रहा हो, उनके विरुद्ध कोई प्रतिकूल तथ्य न हो, वे शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों तथा वास्तव में नियमित रूप से अध्यापन कार्य कर रहे हों।
सत्रांत लाभ के लिए संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक को निर्धारित समय से पहले सक्षम प्राधिकारी को आवेदन देना होगा। आवेदन पत्र के साथ जन्मतिथि के लिए हाईस्कूल प्रमाणपत्र, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का चिकित्सा प्रमाणपत्र, अनुशासनात्मक कार्यवाही न चलने का प्रमाणपत्र, न्यायालय में वाद लंबित न होने का प्रमाणपत्र, पिछले दस वर्षों की गोपनीय आख्या एवं परीक्षाफल तथा आरटीई मानक से अधिक शिक्षक होने की स्थिति में अन्य विद्यालय में कार्य करने की सहमति जैसे अभिलेख संलग्न करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा उपशिक्षा अधिकारियों को औचित्य प्रमाणपत्र के साथ पिछले तीन वर्षों की विषयवार समय सारणी, छात्र संख्या, शिक्षकों की संख्या, अध्यापक डायरी तथा अवकाश का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।