26 से 28 दिसम्बर तक आयोजित होगा हिंदी लिट्रेचर फेस्टिवल, मेजबानी के लिए तैयार हरिद्वार

हरिद्वार। हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल के निदेशक प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि गंगा नगरी हरिद्वार में 26 से 28 दिसंबर तक आयोजित होने वाला हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल–2025 साहित्य, रंगकर्म, शायरी और रचनात्मक संवादों का एक महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। तीन दिवसीय इस साहित्यिक उत्सव का आयोजन श्रीकृष्ण कृपा धाम, भीमगोड़ा में अंतः प्रवाह सोसाइटी, हरिद्वार तथा GIEO गीता संस्थान, कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। फेस्टिवल में देश के विभिन्न हिस्सों से लेखक, कवि, शायर, रंगकर्मी और विचारक सहभागिता करेंगे।

 

फेस्टिवल के पहले दिन उद्घाटन सत्र से पूर्व ‘री-इमेजिंग इंडियन लिटरेचर’ विषय पर शोध पत्र प्रस्तुति हेतु एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इसी दिन स्थानीय नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ओपन माइक सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागी अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। यह सत्र नए लेखकों के लिए अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति को श्रोताओं तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करेगा।

फेस्टिवल का औपचारिक उद्घाटन 26 दिसंबर को अपराह्न 3 बजे होगा। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति डॉ. सत्यपाल सिंह होंगे। वहीं शहर विधायक मदन कौशिक तथा रानीपुर विधायक आदेश चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी का आशीर्वचन भी प्राप्त होगा। उद्घाटन दिवस पर राजस्थान के लोक जीवन पर आधारित ‘Folklore of Vagad’ नामक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की जाएँगी।

फेस्टिवल के दूसरे दिन, 27 दिसंबर को साहित्यिक और वैचारिक सत्र केंद्र में रहेंगे। दिन की शुरुआत ‘सफरनामा: प्रेमभंवर से स्थितप्रज्ञ तक’ विषयक सत्र से होगी, जिसमें लेखक एवं पूर्व उत्तराखंड डीजीपी डॉ. अनिल रतूड़ी अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके पश्चात लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी के पूर्व निदेशक संजीव चोपड़ा ‘India’s Boundaries: Making and Remaking’ विषय पर विशेष संवाद सत्र में सहभागिता करेंगे। हिंदी गीत यात्रा पर एक विशेष संवाद सत्र ललित नारायण मिश्रा जिला विकास अधिकारी, हरिद्वार के साथ आयोजित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त अंग्रेज़ी साहित्य लेखन पर आधारित ‘Whispering Rhythms of Life’ जैसे सत्रों में इतिहास, कविता और जीवनानुभवों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

दूसरे दिन का प्रमुख आकर्षण साहित्य नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नाटक ‘वेलकम, स्वागत है’ का मंचन रहेगा, जिसका निर्देशन डॉ. हितेन्द्र गोयल ने किया है। यह नाटक हरिद्वार में पहली बार प्रस्तुत किया जाएगा।

फेस्टिवल निदेशक प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि इस नाटक के माध्यम से समकालीन सामाजिक यथार्थ को सशक्त रंगमंचीय अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।

फेस्टिवल का तीसरा और अंतिम दिन, 28 दिसंबर को बाल साहित्य, शायरी और कवि सम्मेलनों को समर्पित रहेगा। ‘जियो गीता के संग’ सत्र में स्वामी ज्ञानानंद जी बच्चों से संवाद करेंगे। इसके बाद हरिद्वार के नवोदित बाल एवं किशोर लेखकों पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें युवा रचनाकारों की लेखन प्रक्रिया और रचनात्मक संसार पर चर्चा होगी।

प्रसिद्ध शायर पद्मश्री शीन काफ़ निज़ाम के साथ ‘गुफ़्तगू: आपकी शायरी, आपकी ज़ुबान’ विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके उपरांत मुशायरा एवं कवि सम्मेलन होगा, जिसमें दिलदार देहलवी, अम्बर खरबन्दा, डॉ. ए.एस. कुशवाह सहित देश के चर्चित शायर और कवि अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे।

फेस्टिवल का समापन सांस्कृतिक एवं संगीत प्रस्तुतियों के साथ किया जाएगा। अन्त: प्रवाह सोसायटी के सचिव संजय हांडा ने बताया कि हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल का उद्देश्य साहित्य और कला को आम पाठक व दर्शक से जोड़ना तथा हरिद्वार को एक जीवंत और सशक्त साहित्यिक मंच के रूप में स्थापित करना है।

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