गोल्डन कार्ड योजना का प्रीमियम बढ़ा, हाइब्रिड मोड पर संचालन की तैयारी

देहरादून। गोल्डन कार्ड योजना के तहत प्रीमियम बढ़ने के बाद योजना के पटरी पर लौटने की उम्मीद है। इसके बाद अब बकाया की वजह से बार बार मरीजों का इलाज नहीं रुकेगा। वर्तमान में भुगतान न होने की वजह से कई अस्पताल योजना के तहत इलाज कराने से इंकार करने लगे थे। जबकि कई नए मरीज नहीं ले रहे थे।

गोल्डन कार्ड योजना के तहत सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स को अब पहले के मुकाबले अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ेगा। पहले योजना के तहत कर्मचारी प्रतिमाह 250 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक प्रतिमाह चुका रहे थे। लेकिन अब यह धनराशि प्रतिमाह 425 रुपये से लेकर 1450 रुपये तक प्रतिमाह हो जाएगी।

सचिवालय मीडिया सेंटर में कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि गोल्डन कार्ड योजना में प्रीमियम और खर्च में भारी अंतर होने की वजह से योजना संचालन में कठिनाई आ रही थी। कई बार भुगतान में देरी की वजह से इलाज प्रभावित हो रहे थे। इसलिए अब योजना को तर्कसंगत बनाने के लिए इसका संचालन हाईब्रिड मोड पर करने का निर्णय लिया गया है।

बकाया के लिए 125 करोड़ देगी सरकार

गोल्डन कार्ड योजना के तहत इलाज का राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण पर वर्तमान में 125 करोड़ बकाया है। अस्पतालों की इस बकाया राशि को चुकाने के लिए सरकार की ओर से 125 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। कैबिनेट ने इस संदर्भ में मंजूरी दे दी है और इससे अस्पतालों का पूरा बकाया निपट जाएगा।

जल्द होगा बीमा कंपनियों का चयन

गोल्डन कार्ड योजना व आयुष्मान योजना के लिए जल्द ही बीमा कंपनियों का चयन किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से फिलहाल आयुष्मान के लिए रिलायंस व गोल्डन कार्ड योजना के लिए यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी से प्रीमियम के रेट लिए गए हैं। लेकिन इसके बाद कंपनियों के चयन के लिए फिर से टेंडर किए जाएंगे। सबसे कम रेट देने वाली कंपनी का चयन होगा।

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