शिक्षा का अधिकार डेस्क। गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर देवरिया के एक शिक्षक ने शनिवार 21 फरवरी की सुबह फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव के रहने वाले थे। वह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे और गोरखपुर में अपने बड़े भाई अवधेश सिंह के साथ परिवार सहित रह रहे थे।
शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे कृष्ण मोहन सिंह ने अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उन्होंने देवरिया के शिक्षा विभाग के एक क्लर्क पर प्रताड़ना और भारी रकम लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

परिजनों के अनुसार, कृष्ण मोहन सिंह ने नौकरी और वेतन बहाली के नाम पर पत्नी के गहने बेचकर और बैंक से कर्ज लेकर पैसे दिए थे। आरोप है कि देवरिया के बेसिक शिक्षा विभाग के एक बाबू ने उनसे पहले 20 लाख रुपये की मांग की, जिसे बाद में 16 लाख रुपये में तय किया गया। शिक्षक ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्होंने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए, लेकिन इसके बावजूद उनका वेतन जारी नहीं किया गया। सुसाइड नोट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2016 में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में नियुक्त शिक्षकों का वेतन वर्ष 2022 में रोक दिया गया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। इसके बावजूद संबंधित बाबू द्वारा राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई। शिक्षक ने यह भी लिखा है कि अन्य दो शिक्षकों से भी 16-16 लाख रुपये लिए गए थे। किस्तों में दी गई रकम, कर्ज और अपमान से टूट गए थे शिक्षक सुसाइड नोट के अनुसार, 27 जुलाई को देवरिया में बीएसए कार्यालय के पास पौधशाला के निकट रिश्वत की पहली किस्त दी गई थी, जबकि शेष रकम अलग-अलग तिथियों में दी गई. रुपये की व्यवस्था करने के लिए कृष्ण मोहन सिंह ने पत्नी के गहने गिरवी रखे, जमीन रखी और बैंक से कर्ज लिया। उन्होंने 17 नवंबर को पादरी बाजार स्थित बैंक शाखा से सात लाख रुपये निकालने का भी उल्लेख किया है।
शिक्षक ने अपने पूर्व प्रधानाध्यापक पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने ही बीएसए कार्यालय के बाबू से संपर्क कराया था। सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने लिखा है कि वह कर्ज के बोझ और लगातार हो रहे अपमान से मानसिक रूप से टूट चुके थे। शुक्रवार को उन्हें बीएसए कार्यालय बुलाया गया, जहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिसे वह सहन नहीं कर सके।
कुशीनगर के रहने वाले शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या प्रकरण की जांच में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की लापरवाही सामने आई है। डीएम दिव्या मित्तल की ओर से गठित समिति ने जांच में पाया कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद करीब एक वर्ष तक बीएसए ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। डीएम ने बीएसए के निलंबन व विभागीय कार्यवाही की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है। सोमवार 11 घंटे चली जांच में सवालों की झड़ी ने बीएसए को असहज कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश की नाफरमानी व कार्यालय की कार्य संस्कृति को लेकर हुए सवालों पर बीएसए के जवाब से असंतुष्ट अधिकारियों ने काउंटर सवाल दागा तो बीएसए निरुत्तर हो गईं।
गोरखपुर पुलिस ने देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह आदि पर मुकदमा दर्ज कर लिया। सीडीओ की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की गई।
शासन ने भी चार सदस्यीय जांच टीम देवरिया भेज दी। सुबह 10:20 से शुरू हुई पूछताछ रात करीब नौ बजे तक चली। बीएसए ने शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की ओर से लगाए गए 16 लाख रुपये घूस लेने के आरोप को नकार दिया।