हरिद्वार। हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन “India’s Boundaries: Making & Remaking” विषय पर एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र आयोजित किया गया। सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात इतिहास लेखक एवं पूर्व निदेशक, लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, डॉ. संजीव चोपड़ा रहे। सत्र के माडरेटर डॉ. सुशील उपाध्याय एवं सचिन चौहान रहे।

डॉ.संजीव चोपड़ा ने अपने वक्तव्य में भारत के मानचित्र के निर्माण और पुनर्निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार समय-समय पर राज्यों की भौगोलिक सीमाओं में बदलाव हुआ और राज्य पुनर्गठन में भाषा की भूमिका एक महत्वपूर्ण कारक रही है।

उन्होंने आगामी जनगणना को अत्यंत रोचक बताते हुए कहा कि इसके बाद कुछ नए राज्य पुनर्गठन की मांगें सामने आ सकती हैं। साथ ही जनगणना के आंकड़ों से जुड़े कुछ अहम विमर्श बिंदुओं की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनमें शहरी बनाम ग्रामीण विभाजन, दक्षिण भारत बनाम उत्तर भारत की तुलना, तथा क्रीमी लेयर बनाम नॉन-क्रीमी लेयर जैसे सामाजिक-आर्थिक प्रश्न प्रमुख होंगे।इस सत्र के सूत्रधार डॉ. दीपा एवं डॉ. मुकेश गुप्ता संयुक्त रूप से रहे।