शिक्षा का अधिकार डेस्क। 31 अक्टूबर को सेवानिवृत हुए अपर निदेशक विद्यालयी एवं संस्कृत शिक्षा निदेशक उत्तराखण्ड डॉ. आनंद भारद्वाज को उनकी योग्यता के आधार पर नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें संस्कृत भारती उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।
विदित हो कि शिक्षा विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके डॉ. आनंद भारद्वाज ने गत 31 अक्टूबर को अधिवर्षता पूर्ण की थी। एक सप्ताह के भीतर उनके संस्कृत के प्रति समर्पण एवं बतौर संस्कृत शिक्षा निदेशक किए गए उल्लेखनीय कार्यों के मद्देनजर अब नई जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. भारद्वाज को संस्कृत भारती उत्तराखंड का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की 1997 बैच की परीक्षा के आधार पर उन्होंने 23 अप्रैल 1999 को राजकीय इण्टर कालेज मालदेवता, देहरादून में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। अपनी प्रतिभा एवं कार्यदक्षता के बल पर वह खण्ड शिक्षा अधिकारी रूड़की एवं नारसन में खण्ड शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार एवं चम्पावत में जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक शिक्षा, देहरादून, हरिद्वार एवं पीड़ी में मुख्य शिक्षा अधिकारी, एस.सी.ई.आर.टी. उाराखण्ड में उप निदेशक एवं संयुक्त निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा में संयुक्त निदेशक एवं माध्यमिक शिक्षा में उप निदेशक विधि तथा संयुक्त निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं। डॉ. भारद्वाज के संस्कृत के ज्ञान तथा संस्कृत भाषा पर शोध कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए 31जुलाई 2024 को संस्कृत शिक्षा निदेशक एवं सचिव, उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी के पद का अतिरिक्त कार्यभार प्रदान किया गया था। अब इस कड़ी में उन्हें संस्कृत भारती का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

डॉ. आनंद भारद्वाज ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड से संस्कृत को आम जनमानस की भाषा बनाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि आज का सामाजिक ताना बाना कमजोर हो रहा है तथा लोगों में दूरियां बढ़ रही हैं। इस दूरी को पाटने का काम संस्कृत बहुत बच्चे से कर सकती है। नित्य स्वाध्याय, कम से कम पूरे परिवार को एक बार प्रतिदिन साथ में भोजन तथा सप्ताह में एक बार नजदीकियों से मुलाकात जरूर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष एक लाख लोगों को संस्कृत संभाषण का प्रशिक्षण देना संस्कृत भारती का लक्ष्य है। डॉ. भारद्वाज ने कहा कि संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए वह पूर्ण मनोयोग से कार्य करेंगे।