शिक्षा का अधिकार डेस्क। राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सभी स्कूल भवनों का सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश दिए। विदित हो कि वर्ष 2010 में बागेश्वर में स्कूल की बिल्डिंग गिरने से बच्चों की मौत हो गई थी।
शुक्रवार को कैंट रोड स्थित आवास में अधिकारियों के साथ नियमित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट हिदायत दी कि जर्जर एवं असुरक्षित स्कूल भवनों में बच्चों को किसी भी स्थिति में न बैठाया जाए।

सीएम ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहां भी स्कूल भवन मरम्मत योग्य हो, वहां शीघ्र मरम्मत कराया जाए और जहां पुनर्निर्माण की आवश्यकता हो, वहां उसकी कार्य योजना बनाकर तत्परता से क्रियान्वयन किया जाए। प्रदेश के सभी पुलों का भी सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिन पुलों की स्थिति खराब हो रही है, उनका आवश्यकतानुसार मरम्मत और पुनर्निर्माण प्राथमिकता पर किया जाए। पुलों की स्थिति पर नियमित निगरानी की जाए और कहीं भी जर्जर पुलों के कारण कोई जनहानि न हो।
उत्तराखंड के सैकड़ों स्कूल कर रहे मरम्मत का इंतजार
राज्य के सरकारी स्कूलों की हालत भी ज्यादा संतोषजनक नहीं है। शिक्षा विभाग के अपने ही सर्वे में 1172 स्कूल संवेदनशील श्रेणी में पाए गए हैं। मालूम हो कि बीते साल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति के आधार पर उन्हें ए से लेकर डी तक चार श्रेणियों में बांटा था। राज्य के 16 हजार 221 स्कूलों के भवनों का विभिन्न मानकों के आधार पर अध्ययन करने के बाद ये चार श्रेणियां बनाईं गईं। इन स्कूलों में 11 हजार 465 स्कूल बी से डी श्रेणी में आए।। इनमें अतिसंवेदनशील यानि तत्काल मरम्मत की आवश्यकता वाले स्कूलों की संख्या 1172 है। इनमें बेसिक स्कूल 1060 और माध्यमिक स्कूल 112 हैं। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार बी और सी श्रेणी में सामान्य मरम्मत के आधार पर स्थिति को सुधारा जा सकता है। लेकिन ज्यादा चिंताजनक स्थिति डी श्रेणी के स्कूलों की है।