झारखंड में एक नया शराब घोटाला सामने आया है। धनबाद जिले में 802 बोतल शराब पीने का आरोप चूहों पर लगाया गया। आरोप लगाने वालों ने कहा कि चूहों ने पहले बोतल के ढक्कन को कुतरा, फिर उसमें पूंछ डुबाई और अपनी पूंछ को चाट कर शराब गटक गए।
दरअसल राज्य में साल 2022 में नई उत्पाद नीति लागू की गई थी। जिसके मुताबिक शराब की थोक और खुदरा बिक्री सरकार खुद कर रही थी। झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से सरकार ऐसा कर रही थी। खुदरा दुकानों के संचालन के लिए मैन पावर सप्लाई का ठेका कई कंपनियों को दिया गया था। उन्हें यह ठेका 31 जून 2025 तक का ही मिला था।
बीती 1 जुलाई से जब जेएसबीसीएल ने प्लेसमेंट एजेंसियों से शराब दुकानों को टेकओवर करना शुरू किया, उसी दौरान यह खुलासा हुआ. अधिकारियों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के दौरान धनबाद जिले के बलियापुर और प्रधानखंडा की दुकानों में 802 बोतल शराब स्टॉक से कम मिले. उन बोतलों के ढक्कनों में छेद थे और शराब गायब थी।
जब वजह पूछी गई तो दुकानदारों ने कहा कि शराब चूहे पी गए। अजीब सा तर्क देते हुए दुकानदारों ने बताया कि चूहों ने पहले बोतलों के ढक्कन कुतरे, फिर अपनी पूंछ को ढक्कर के भीतर डाला और उसे चाट गए।
मीडिया में मामला आने पर राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया। आनन-फानन में विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जांच का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “कई पूर्ववर्ती सरकारों में भी चूहों की भूमिका सामने आई है। लेकिन इस बार उन चूहों की शिनाख्त जरूर होकर रहेगी। यह देखना है कि दो पांव वाले चूहे हैं या जमीन पर रेंगने वाले चूहे हैं। जांच होगी और कार्रवाई भी होगी।
मंत्री के आदेश के बाद जांच हुई। इस दौरान पाया कि आरके एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के पास इन दुकानों में मैनपावर सप्लाई का ठेका था। उसी ने यह घोटाला किया है। इस तरह विभागीय जांच में चूहे निर्दोष साबित हो गए हैं। अब कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।