देहरादून। वर्षों सेवा में होने के बावजूद प्रमोशन के लिए तरस रहे शिक्षकों को चयन और प्रोन्नत वेतनमान के वक्त कोई अतिरिक्त इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा। पिछले नौ साल से जारी विवाद में सरकार ने आखिरकार इंक्रीमेंट पर स्थिति साफ कर दी। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सरकारी कर्मचारी वेतन नियम 2016 में इस बाबत संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी की है। उधर शिक्षक संगठनों ने आदेश को तुगलकी फरमान बताते हुए इसके विरोध की बात कही है।
वित्त सचिव के अनुसार पूर्व में अतिरिक्त इंक्रीमेंट पा चुके शिक्षकों से फिलहाल रिकवरी नहीं की जाएगी। लेकिन, उनके वेतनमान को नए सिरे से संशोधित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इससे शिक्षकों के वेतन से एक इंक्रीमेंट की कटौती हो जाएगी। चयन और प्रोन्नत वेतनमान पर एक इंक्रीमेंट का लाभ ले चुके करीब पांच हजार शिक्षक इस फैसले के दायरे में आ रहे हैं।
यह है विवाद: शिक्षकों को 10 और उसके बाद 12 साल की सेवा अवधि के बाद उच्चतर वेतनमान दिया जाता है। वर्ष 2016 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद से शिक्षकों को चयन-प्रोन्नत वेतनमान पर एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट मिलने लगा था। छह सितंबर 2019 को एक शासनादेश जारी कर सरकार ने नई व्यवस्था लागू कर दी। इसके तहत चयन प्रोन्नत वेतनमान के दायरे में आने पर वेतन मैट्रिक्स में अगली कोष्ठिका में तय करने का प्रावधान कर दिया गया। एक जनवरी 2016 से 13 सितंबर 2019 के बीच बड़ी संख्या में शिक्षकों को इंक्रीमेंट का लाभ मिल गया था। वर्ष 2019 के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से पूर्व में दिए गए इंक्रीमेंट की रिकवरी शुरू कर दी। शिक्षकों ने इस मामले में हाईकोर्ट में रिट दायर की। हाईकोर्ट के स्टे की वजह से शिक्षकों को इंक्रीमेंट का लाभ मिलता आ रहा था।
